इनकम टैक्स कैलकुलेटर 2026-27: सैलरी पर कितना टैक्स?

पेज अपडेट: 9 अक्टूबर 2026 · टैक्स ईयर 2026-27 (1 अप्रैल 2026 – 31 मार्च 2027)

अपनी सालाना आय डालिए; कैलकुलेटर नए और पुराने दोनों रिजीम में टैक्स, रिबेट और सेस साथ-साथ दिखाता है। कटौतियाँ अपनी-अपनी क़ानूनी सीमा के साथ गिनी जाती हैं, ताकि एक ही सीमा दो बार न लगे।

इनकम टैक्स कैलकुलेटर

यह कैलकुलेटर किसके लिए है:

  • भारत के निवासी (Resident) व्यक्ति, टैक्स ईयर 2026-27
  • सिर्फ़ सामान्य दर वाली आय: सैलरी/पेंशन, ब्याज, किराया (कटौती के बाद) आदि
  • कुल टैक्सेबल आय ₹50 लाख तक (इसके ऊपर सरचार्ज लगता है, जो यहाँ नहीं गिना जाता)

Form 16 (नए नियमों में Form 130) का "Gross Salary"। सैलरी न हो तो 0। स्टैंडर्ड डिडक्शन अपने आप लगता है।

बैंक/FD ब्याज, किराए की टैक्सेबल रकम आदि।

पुराने रिजीम की कटौतियाँ (वैकल्पिक)

हर ख़ाना अपनी सीमा तक ही गिना जाता है। नए रिजीम में इनमें से कोई कटौती नहीं मिलती।

धारा 123 (पहले 80C) की साझा सीमा ₹1,50,000 — कर्मचारी PF भी इसी में।

सीमा ₹50,000 (पहले 80CCD(1B))।

सीमा ₹25,000; आप 60+ हों तो ₹50,000 (पहले 80D)।

सीमा ₹2,00,000 (पहले 24(b))।

यह टूल HRA छूट ख़ुद नहीं गिनता; एम्प्लॉयर/Form 16 वाली रकम डालें।

अधिकतम ₹2,500 गिना जाता है; सिर्फ़ पुराने रिजीम में घटता है।

जैसे एजुकेशन लोन ब्याज या दान। इस पर टूल कोई सीमा नहीं लगाता — सही रकम ही डालें।

अनुमान · टैक्स ईयर 2026-27

कम टैक्स वाला रिजीम

नए और पुराने रिजीम में टैक्स का हिसाब
नयापुराना

नया टैक्स रिजीम: स्लैब 2026-27

नया रिजीम डिफ़ॉल्ट है। ये दरें धारा 202(1) में हैं और हर उम्र के लिए एक जैसी हैं:

कुल टैक्सेबल आयदर
₹4,00,000 तक0%
₹4,00,001 – ₹8,00,0005%
₹8,00,001 – ₹12,00,00010%
₹12,00,001 – ₹16,00,00015%
₹16,00,001 – ₹20,00,00020%
₹20,00,001 – ₹24,00,00025%
₹24,00,000 से ऊपर30%

हर सैलरी पर पूरा हिसाब: नया रिजीम: 5 लाख से 50 लाख की सैलरी पर टैक्स।

पुराना टैक्स रिजीम: स्लैब

कुल टैक्सेबल आय60 से कम60–7980+
₹2.5 लाख तक0%0%0%
₹2.5 – ₹3 लाख5%0%0%
₹3 – ₹5 लाख5%5%0%
₹5 – ₹10 लाख20%20%20%
₹10 लाख से ऊपर30%30%30%

पुराना रिजीम पाने के लिए धारा 202(4) के तहत विकल्प चुनना पड़ता है; बिना बिज़नेस आय वाले लोग यह रिटर्न के साथ चुन सकते हैं।

12 लाख तक टैक्स क्यों नहीं लगता?

धारा 156 के अनुसार नए रिजीम में कुल आय ₹12 लाख तक हो, तो ₹60,000 तक का टैक्स रिबेट से माफ़ होता है — और ₹12 लाख पर स्लैब का टैक्स ठीक ₹60,000 बनता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने पर यह ₹12.75 लाख सैलरी तक पहुँचता है।

मार्जिनल रिलीफ़: आय ₹12 लाख से थोड़ी ज़्यादा हो, तो टैक्स (सेस से पहले) उस अतिरिक्त आय से ज़्यादा नहीं होता। जैसे, टैक्सेबल आय ₹12.25 लाख पर टैक्स (सेस से पहले) ₹25,000 है, स्लैब वाला ₹63,750 नहीं।

उदाहरण: 15 लाख सैलरी पर टैक्स

रवि की सालाना सैलरी ₹15 लाख है, नया रिजीम: ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹14,25,000, और सेस मिलाकर कुल टैक्स ₹97,500 (लगभग ₹8,125 महीना)। पुराने रिजीम में ₹1.5 लाख की धारा-123 कटौती लेकर भी टैक्स ₹2,10,600 बनता है — यानी नया रिजीम ₹1,13,100 सस्ता। ऊपर ₹15,00,000 डालकर मिलाएँ।

कौन-सा रिजीम चुनें?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टैक्स ईयर 2026-27 का मतलब?

1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act 2025 लागू है, जिसमें "प्रीवियस ईयर/असेसमेंट ईयर" की जगह "टैक्स ईयर" है। टैक्स ईयर 2026-27 = 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 की आय। विस्तार से पढ़ें।

₹50 लाख से ज़्यादा आय पर नतीजा क्यों नहीं दिखता?

उस आय पर सरचार्ज (और उस पर मार्जिनल रिलीफ़) लगता है, जो यह टूल नहीं गिनता। ग़लत भरोसेमंद नतीजा दिखाने से बेहतर है कि टूल साफ़ बता दे।

NRI इसे क्यों इस्तेमाल न करें?

रिबेट सिर्फ़ निवासी व्यक्तियों को मिलता है और NRI की आय के नियम अलग हैं। इसलिए "निवासी: नहीं" चुनने पर टूल हिसाब नहीं दिखाता।

प्रकाशक: SaralPaisa। SaralPaisa कोई वित्तीय सलाहकार, CA या SEBI-रजिस्टर्ड संस्था नहीं है; यह पेज शिक्षा के लिए है। हमारे बारे में · डिस्क्लेमर