इनकम टैक्स कैलकुलेटर 2026-27: सैलरी पर कितना टैक्स?
अपनी सालाना आय डालिए; कैलकुलेटर नए और पुराने दोनों रिजीम में टैक्स, रिबेट और सेस साथ-साथ दिखाता है। कटौतियाँ अपनी-अपनी क़ानूनी सीमा के साथ गिनी जाती हैं, ताकि एक ही सीमा दो बार न लगे।
इनकम टैक्स कैलकुलेटर
यह कैलकुलेटर किसके लिए है:
- भारत के निवासी (Resident) व्यक्ति, टैक्स ईयर 2026-27
- सिर्फ़ सामान्य दर वाली आय: सैलरी/पेंशन, ब्याज, किराया (कटौती के बाद) आदि
- कुल टैक्सेबल आय ₹50 लाख तक (इसके ऊपर सरचार्ज लगता है, जो यहाँ नहीं गिना जाता)
Form 16 (नए नियमों में Form 130) का "Gross Salary"। सैलरी न हो तो 0। स्टैंडर्ड डिडक्शन अपने आप लगता है।
बैंक/FD ब्याज, किराए की टैक्सेबल रकम आदि।
पुराने रिजीम की कटौतियाँ (वैकल्पिक)
हर ख़ाना अपनी सीमा तक ही गिना जाता है। नए रिजीम में इनमें से कोई कटौती नहीं मिलती।
धारा 123 (पहले 80C) की साझा सीमा ₹1,50,000 — कर्मचारी PF भी इसी में।
सीमा ₹50,000 (पहले 80CCD(1B))।
सीमा ₹25,000; आप 60+ हों तो ₹50,000 (पहले 80D)।
सीमा ₹2,00,000 (पहले 24(b))।
यह टूल HRA छूट ख़ुद नहीं गिनता; एम्प्लॉयर/Form 16 वाली रकम डालें।
अधिकतम ₹2,500 गिना जाता है; सिर्फ़ पुराने रिजीम में घटता है।
जैसे एजुकेशन लोन ब्याज या दान। इस पर टूल कोई सीमा नहीं लगाता — सही रकम ही डालें।
कम टैक्स वाला रिजीम
| नया | पुराना |
|---|
इस हिसाब की मान्यताएँ और सीमाएँ
- नए रिजीम के स्लैब Income-tax Act 2025 की धारा 202(1) से; रिबेट धारा 156 से (पहले 87A): नए रिजीम में ₹12 लाख तक की आय पर ₹60,000 तक, उसके ठीक ऊपर मार्जिनल रिलीफ़; पुराने में ₹5 लाख तक ₹12,500 तक।
- स्टैंडर्ड डिडक्शन सिर्फ़ सैलरी/पेंशन पर: नए रिजीम (धारा 202(1)) में ₹75,000, बाक़ी मामलों में ₹50,000, दोनों सैलरी से ज़्यादा नहीं (Income-tax Act 2025 की धारा 19)। पुराने रिजीम के स्लैब द्वितीयक स्रोतों पर आधारित हैं।
- 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ा गया है। आय को ₹10 तक गोल करना, सरचार्ज, ख़ास-दर वाली आय, नुक़सान का समायोजन और HRA की अपनी गणना शामिल नहीं।
- बिज़नेस/प्रोफ़ेशन की आय वाले लोगों के लिए रिजीम चुनने के नियम अलग हैं (धारा 202(4))।
नया टैक्स रिजीम: स्लैब 2026-27
नया रिजीम डिफ़ॉल्ट है। ये दरें धारा 202(1) में हैं और हर उम्र के लिए एक जैसी हैं:
| कुल टैक्सेबल आय | दर |
|---|---|
| ₹4,00,000 तक | 0% |
| ₹4,00,001 – ₹8,00,000 | 5% |
| ₹8,00,001 – ₹12,00,000 | 10% |
| ₹12,00,001 – ₹16,00,000 | 15% |
| ₹16,00,001 – ₹20,00,000 | 20% |
| ₹20,00,001 – ₹24,00,000 | 25% |
| ₹24,00,000 से ऊपर | 30% |
हर सैलरी पर पूरा हिसाब: नया रिजीम: 5 लाख से 50 लाख की सैलरी पर टैक्स।
पुराना टैक्स रिजीम: स्लैब
| कुल टैक्सेबल आय | 60 से कम | 60–79 | 80+ |
|---|---|---|---|
| ₹2.5 लाख तक | 0% | 0% | 0% |
| ₹2.5 – ₹3 लाख | 5% | 0% | 0% |
| ₹3 – ₹5 लाख | 5% | 5% | 0% |
| ₹5 – ₹10 लाख | 20% | 20% | 20% |
| ₹10 लाख से ऊपर | 30% | 30% | 30% |
पुराना रिजीम पाने के लिए धारा 202(4) के तहत विकल्प चुनना पड़ता है; बिना बिज़नेस आय वाले लोग यह रिटर्न के साथ चुन सकते हैं।
12 लाख तक टैक्स क्यों नहीं लगता?
धारा 156 के अनुसार नए रिजीम में कुल आय ₹12 लाख तक हो, तो ₹60,000 तक का टैक्स रिबेट से माफ़ होता है — और ₹12 लाख पर स्लैब का टैक्स ठीक ₹60,000 बनता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने पर यह ₹12.75 लाख सैलरी तक पहुँचता है।
मार्जिनल रिलीफ़: आय ₹12 लाख से थोड़ी ज़्यादा हो, तो टैक्स (सेस से पहले) उस अतिरिक्त आय से ज़्यादा नहीं होता। जैसे, टैक्सेबल आय ₹12.25 लाख पर टैक्स (सेस से पहले) ₹25,000 है, स्लैब वाला ₹63,750 नहीं।
उदाहरण: 15 लाख सैलरी पर टैक्स
रवि की सालाना सैलरी ₹15 लाख है, नया रिजीम: ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹14,25,000, और सेस मिलाकर कुल टैक्स ₹97,500 (लगभग ₹8,125 महीना)। पुराने रिजीम में ₹1.5 लाख की धारा-123 कटौती लेकर भी टैक्स ₹2,10,600 बनता है — यानी नया रिजीम ₹1,13,100 सस्ता। ऊपर ₹15,00,000 डालकर मिलाएँ।
कौन-सा रिजीम चुनें?
- ₹12.75 लाख तक की सैलरी: नए रिजीम में टैक्स शून्य है; पुराना इससे कम नहीं कर सकता।
- इससे ऊपर: पुराना रिजीम तभी सस्ता होता है जब कटौतियाँ बहुत बड़ी हों। हर सैलरी के लिए ब्रेक-ईवन: पुराना vs नया रिजीम।
- FD ब्याज जुड़ने पर: आपकी आय पर FD ब्याज से कितना टैक्स बढ़ सकता है, इसका अनुमान FD कैलकुलेटर के "मेरी आय से" तरीके में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टैक्स ईयर 2026-27 का मतलब?
1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act 2025 लागू है, जिसमें "प्रीवियस ईयर/असेसमेंट ईयर" की जगह "टैक्स ईयर" है। टैक्स ईयर 2026-27 = 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 की आय। विस्तार से पढ़ें।
₹50 लाख से ज़्यादा आय पर नतीजा क्यों नहीं दिखता?
उस आय पर सरचार्ज (और उस पर मार्जिनल रिलीफ़) लगता है, जो यह टूल नहीं गिनता। ग़लत भरोसेमंद नतीजा दिखाने से बेहतर है कि टूल साफ़ बता दे।
NRI इसे क्यों इस्तेमाल न करें?
रिबेट सिर्फ़ निवासी व्यक्तियों को मिलता है और NRI की आय के नियम अलग हैं। इसलिए "निवासी: नहीं" चुनने पर टूल हिसाब नहीं दिखाता।
स्रोत और जाँच
नीचे वे स्रोत हैं जिन्हें इस पेज के नियमों/दरों के लिए खोलकर मिलाया गया। "जाँचा" तारीख़ वह दिन है जब स्रोत खोला गया; पेज की "अपडेट" तारीख़ अलग है।
- Income-tax Act 2025, धारा 202 (नया टैक्स रिजीम, स्लैब) — नए रिजीम के स्लैब; धारा 202(4) से बाहर निकलने का विकल्प। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 19 (सैलरी से कटौतियाँ) — स्टैंडर्ड डिडक्शन: धारा 202(1) (नया रिजीम) में ₹75,000, बाक़ी मामलों में ₹50,000 — दोनों में सैलरी से ज़्यादा नहीं। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 156 (रिबेट) — ₹12,500 (₹5 लाख तक), नए रिजीम में ₹60,000 (₹12 लाख तक) और मार्जिनल रिलीफ़। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- Income-tax Act 2025, धारा 123 (पहले 80C) — ₹1,50,000 की सीमा; Schedule XV की पूरी सूची इस पेज पर नहीं खुली। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- आयकर विभाग: Interplay and Transition FAQs — 1 अप्रैल 2026 से नया एक्ट; FY 2025-26 पुराने एक्ट से; टैक्स ईयर; Form 121; AIS की जगह Form 168। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- आयकर विभाग: Form No. 130 FAQs — Form 130 ने Form 16 की जगह ली। आधिकारिक/प्राथमिक स्रोत जाँचा: 9 अक्टूबर 2026
- LiveLaw: बजट 2026-27 में स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं बदले — पुराने रिजीम के स्लैब और बजट 2026-27 में स्लैब/स्टैंडर्ड डिडक्शन अपरिवर्तित रहने की ख़बर — पुराने रिजीम के स्लैब प्राथमिक स्रोत पर अलग से नहीं जाँचे (स्टैंडर्ड डिडक्शन की रकम अब धारा 19 से जाँची गई)। द्वितीयक स्रोत — प्राथमिक पर अलग से नहीं जाँचा जाँचा: 8 अक्टूबर 2026